जिस प्रकार से भारत में 5G नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है, उसी के साथ अब भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में 5G डिवाइसेज की शिपमेंट काफी ज्यादा बढ़ने वाली है और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2023 के अंत होने के पहले ही भारत में 5G स्मार्टफोन की शिपमेंट 4G स्मार्टफोन को पीछे छोड़ने वाली है। जिस प्रकार से भारत में एयरटेल तथा रिलायंस जिओ टेलीकॉम कंपनियां तेजी से 5G नेटवर्क को देश के कोने कोने तक पहुंचाने में जुटी है उसे देखते हुए 5G स्मार्टफोन की बिक्री में होने वाली बढ़ोतरी में यह बड़ा कारण साबित होने वाला है। लेकिन इस साल हमें कुल अनुमानित शिफ्ट में कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है और इसका मुख्य कारण इस साल कंपोनेंट्स की सप्लाई में रुकावटों और स्लोडाउन साबित हो सकता है।
एक बड़ी और काफी जानी-मानी मार्केट रिसर्च फर्म Counterpoint ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी प्रदान करी कि भारत में साल 2023 में 5G सर्विसेज के विकास के साथ 5G स्मार्टफोन की डिमांड भारी मात्रा में बढ़ने वाली है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि देश में 5G नेटवर्क के माध्यम से प्रोवाइड डाटा की स्पीड 4G नेटवर्क से करीब 10 गुना तक ज्यादा तेज हो सकती है। ऐसे में जो मिडिल क्लास के व्यक्ति हैं वह 5G नेटवर्क को एक्सपीरियंस करने के लिए कम प्राइस के 5G स्मार्टफोन को खरीदने में ज्यादा इंटरेस्ट लेंगे और इसी कारण ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि कम प्राइस वाली कैटेगरी में 5G स्मार्टफोन्स की हिस्सेदारी वर्ष 2023 में वर्तमान से बढ़कर करीब 30% अधिक तक पहुंच सकती है।
आपको बता दें कि एक बजट फ्रेंडली 5G स्मार्टफोन को बनाने के लिए दो बड़ी कंपनियां साथ मिलकर काम कर रही है जिनमें भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जिओ और सबसे बड़े सर्च इंजन Google की अमेरिकी कंपनी Alphabet दोनों साथ आई है, दोनों की पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य भारत के लोगों को एक बजट फ्रेंडली 5G स्मार्टफोन प्रोवाइड करना है। आपको बता दें कि इंडियन टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने बीते कुछ ही महीनों पहले जो 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई थी उसमें नीलामी में सबसे अधिक खर्च किया था।
ऐसा सुनने में आ रहा है कि साल 2023 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल महीने से लेकर जून माह तक के बीच में 5G स्मार्टफोन की कुल शिपमेंट्स की संख्या 10 करोड़ यूनिट्स से भी ज्यादा हो सकती हैं। और इसी तेज गति के साथ साल के आखरी तक 5G स्मार्टफोन की शिपमेंट्स 4G हैंडसेट्स की शिपमेंट्स के मामले में पीछे छोड़ देंगी। अगर हम बात करें वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून तक के बीच भारत में बने डिवाइस यानी मेड इन इंडिया स्मार्टफोन की शिपमेंट्स में काफी ज्यादा तेजी देखने को मिली थी। लेकिन तीसरी तिमाही के साथ ही जो मेड इन इंडिया स्मार्टफोन की डिमांड घटना शुरू हुई तथा वर्ष-दर-वर्ष के हिसाब से करीब 8 प्रतिशत मेड इन इंडिया स्मार्टफोन की डिमांड घट चुकी है। भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में मेड इन इंडिया फोन की कुल 5.2 करोड़ से अधिक यूनिट्स की शिपमेंट्स की गई। और इसका मुख्य कारण सेल्स में कमी आना बताया गया है।
मार्केट रिसर्च के आधार पर Counterpoint द्वारा यह जानकारी प्रदान की गई है कि कुछ देशों के बीच तनाव की स्थिति तथा मुख्य रूप से एंट्री लेवल सेगमेंट के समय मेड इन इंडिया स्मार्टफोन की कंज्यूमर डिमांड में कमी आना बड़ा कारण बनकर सामने आए है। और जिसके पीछे स्लोडाउन एक बड़ा रीजन बना है। इसके अतिरिक्त भी तिमाही के शुरुआती समय में हैंडसेट के प्रोडक्शन में इनवेंटरी अधिक होना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अतिरिक्त आपको बता दें कि अमेरिकी कंपनी Apple इस साल भी iPhone के निर्माण के कारण ही ग्लोबल स्मार्टफोन में रेवेन्यू के आधार पर बाकी कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए टॉप पोजीशन कायम रखी है। एप्पल कंपनी ने साल की तीसरी तिमाही यानी जुलाई सितंबर माह के बीच लगभग 3% की सेल्स में गिरावट होने के बावजूद भी रेवेन्यू के मामले में अपनी हिस्सेदारी अधिक बढ़ाई है। और इस साल दुनिया की टॉप स्मार्टफोन कंपनी बनने की पीछे का बड़ा कारण एप्पल के एवरेज सेलिंग प्राइस में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी साबित हुआ है।






