अब नए Android स्मार्टफोन में कम होंगे Google के Default ऐप्स, सरकार ने दिए कंपनी को आदेश – Google दुनिया की एक ऐसी ग्लोबल टेक कंपनी हे जोकि टेक्नोलॉजी की फील्ड में सबसे आगे हैं लेकिन भारत में कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया CCI द्वारा Google कंपनी के खिलाफ साल 2022 में लिए गए फैसले का सीधा असर अब हमें Android डिवाइसेज में देखने को मिलने वाला है। CCI द्वारा लिए गए इस फैसले को लेकर गूगल को भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चर्ड कंपनियां जैसे सैमसंग और शाओमी आदि के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) के साथ किए गए अपने सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स में भी बदलाव तथा संशोधन करना होगा।
इस मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट लीक हुई है जिसके माध्यम से यह जानकारी मिली है कि भारत में व्यापार करने वाली डिवाइस मैन्युफैक्चरर्स कंपनियों को अपनी स्मार्टफोन और टैबलेट्स जैसे डिवाइसेज जिनमें एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम दिया जाता है उनको देश में ग्लोबल MADA (मोबाइल एप्लिकेशन डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस) के अंतर्गत रिलीज करने की प्रक्रिया को जारी रख सकते हैं दूसरे विकल्प के अंतर्गत वह नए IMADA लाइसेंस को भी चुन सकते हैं।
रिपोर्ट्स के माध्यम से यह भी बताया जा रहा है कि IMADA एग्रीमेंट भारत में जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। इसी के साथ इस नए एग्रीमेंट में OEM अब आने वाले नए एंड्रॉयड स्मार्टफोन में साथ में मिलने वाले गूगल कंपनी के 11 ऐप्स के प्री-इंस्टॉलेशन को भी हटाया जा सकता हैं। IMADA एग्रीमेंट के अंतर्गत कई बदलाव होना संभव है जिसमें सर्च बार को स्क्रीन पर से हटाया जा सकता है तथा गूगल ऐप्स फोल्डर को भी डिवाइस की होमस्क्रीन से भी हटा दिया जा सकता है ।
नए एग्रीमेंट के अंतर्गत अब एंड्रॉयड डिवाइस का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अपने फोन को सेटअप करने पर डिफॉल्ट सर्च इंजन को भी अपने हिसाब से चुन सकते हैं। इस खबर के बारे में जानकारी लीक करने वाले टिप्सटर Kuba Wojciechowski (@Za_Raczke) ने कुछ समय पहले ही एक ट्वीट के माध्यम से इस महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में जानकारी प्रदान करी थी और साथ ही उन्होंने इससे जुड़े दस्तावेज तक पहुंच होने के बारे में भी अपना दावा प्रस्तुत किया था।
भारत में नए IMADA लाइसेंस के माध्यम से इसे स्मार्टफोन मैन्युफैक्चर कंपनियों को यह स्वतंत्रता भी दी जाएगी कि वह निर्मित किए जा रहे स्मार्टफोन में किन-किन गूगल ऐप्स को फ्री इंस्टॉलेशन के तहत शामिल करना चाहते हैं। यहाँ पर एक शर्त का पालन करना होगा जो कि यह है कि IMADA के अंतर्गत निर्मित होने वाले डिवाइसेज को केवल भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में ही बेचा जा सकता है। Wojciechowski का इस मामले पर कुछ यह कहना है कि इन सब के अतिरिक्त भी OEM को ऐसी कोर सर्विसेज को शामिल करने की आवश्यकता पढ़ सकती है जो Google API के लिए बेहद ही आवश्यक हैं।
गूगल द्वारा निर्मित एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का पूरी स्मार्टफोन की दुनिया में दबदबा है क्योंकि बात करें अकेले भारत की तो इसमें 60 करोड़ स्मार्टफोन्स में से लगभग 97 प्रतिशत ऐसे स्मार्टफोन हैं जोकि एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर कार्य करते हैं। इंडिया की CCI संस्था ने गूगल की पैरंट अमेरिकी कंपनी Alphabet Inc पर अपने खुद के ऑपरेटिंग सिस्टम (एंड्रॉयड) के दम पर संपूर्ण स्मार्टफोन मार्केट में अपने दबदबे वाली स्थिति का गलत रूप से उपयोग करने में दोषी पाते हुए पिछले साल 2022 के अक्टूबर माह में करीब 16.1 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया था।
गूगल कंपनी द्वारा इस जुर्माने के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में अपील की गई थी। लेकिन गूगल को यहां पर भी निराशा ही हाथ लगी क्योंकि NCLAT ने CCI द्वारा लगाई गई इस पेनल्टी पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था। लेकिन गूगल यहां पर भी नहीं रुका इसके बाद कंपनी द्वारा NCLAT के ऑर्डर को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने भी गूगल पर लगी इस पेनल्टी पर रोक लगाने से मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गूगल को NCLAT के फैसले के अंतर्गत कुल जुर्माने की 10 प्रतिशत राशि जमा करने का आदेश सुनाया था।






