वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों में आ रही दिमागी समस्या, हो जाए सावधान – आज के समय में स्मार्टफोन हमारा एक अभिन्न अंग बन चुका है। दिन भर में हमें कई बार स्मार्टफोन टैबलेट इत्यादि की आवश्यकता पड़ती है। जहां एक और यह हमारा काम आसान करते हैं। वहीं दूसरी ओर इसे हमें कुछ खतरे भी है। दरअसल स्मार्टफोन टैबलेट की लत केवल युवाओं को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी बेहद ज्यादा रहती है। एक स्टडी के मुताबिक स्मार्टफोन की लत कई प्रकार के बुरे प्रभाव को जन्म देती है। हाल ही में आई एक स्टडी में बताया गया की टेबलेट या मोबाइल फोन पर ज्यादा देर तक वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों में मनोवैज्ञानिक जटिलताये देखने को मिलती है तथा बच्चों के दिमागी स्वास्थ्य पर भी इसका काफी गलत प्रभाव पड़ता है।
दरअसल कनाडा के मेडिकल यूनिवर्सिटी में कुछ शोधकर्ताओं ने इस चीज के बारे में स्टडी की जिनमें उन्होंने पाया कि युवाओं में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा उपयोग करने से 23 से 24 साल की उम्र में जाकर उन्हें डेल्यूजन, पैरानॉइया, हेलूसीनेशन जिसे मति भ्रम भी कहा जाता है ऐसी समस्या बनती है। दरअसल यह सभी समस्या दिमाग से जुड़ी हुई है। शोधकर्ताओं ने 1997 से 1998 के बीच जन्मे 1226 युवाओं पर इस बात का विश्लेषण किया जिसे की उन्होंने JAMA Psychiatry नामक जर्नल में प्रकाशित भी किया है।
रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने इन युवाओं से कई प्रकार के सवाल पूछे। जिनमें कि उन्हें परेशान करने वाले विचार तथा अजीब किस्म के अनुभव हुए। इन सवालों के अंतर्गत कुछ ऐसे भी सवाल थे जिसमें यह पूछा गया कि क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि लोग आपके बारे में कोई हिंट देते हैं या फिर आपसे कोई दो मतलब वाली बातें करते हैं। या फिर कभी आपने ऐसा महसूस किया है कि आपका मन में जो विचार आ रहे हैं वह दरअसल आपके विचार नहीं है। क्या आपने कभी अकेले होने पर किसी चीज की आवाज़ें सुनी है।
इन सवालों के जवाबों के आधार पर शोधकर्ता ने बताया कि किशोर अवस्था में वीडियो गेम ज्यादा खेलने वाले 3 से 7 प्रतिशत ज्यादा मनोवैज्ञानिक अनुभव किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि हम अकेले टेक्नोलॉजी पर दोष नहीं दे रहे हैं। यदि किसी बच्चे में इस प्रकार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो यह इस बात की चेतावनी है कि वह दिमागी रूप से बीमार हो सकता है। वही रिसर्च टीम में यह भी बताया कि युवाओं को एकदम से स्क्रीन से दूर कर देने से इस समस्या का हल नहीं होगा तथा यह ज्यादा नुकसानदाई भी साबित हो सकता है। हालांकि टीम इस समय युवाओं में ऐसे दिमाग के लक्षण क्यों पैदा होते हैं तथा इन समस्याओं से किस प्रकार निपटा जा सके इसके बारे में रिसर्च कर रही हैं।






