डिजिटल रुपए की लेन देन हुई 10 लाख रुपए प्रतिदिन से भी ज्यादा – दिसंबर 2023 में देश के बैंकों ने कुछ एंप्लॉयी बेनिफिट को डिजिटल रूपयो में प्रदान किए हैं। पिछले वर्ष के अंत तक इसकी प्रतिदिन 10 लाख ट्रांजैक्शन का टारगेट पूरा करने में रिजर्व बैंक आफ इंडिया को आसानी हुई थी। ई रुपए या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को कैश के डिजिटल विकल्प के तौर पर डिसटीब्युटेड लेजर टेक्नोलॉजी द्वारा तैयार किया गया है।
आपको बता दे की ई रुपए का ट्रायल आरबीआई ने प्रारंभ किया था। हालांकि पिछले साल अक्टूबर महीने में ई रुपए का ट्रांजैक्शन 25000 प्रतिदिन तक पहुंचा था। जिसके बाद इसका यूज केस काफी ज्यादा बढ़ाया गया और फिर इसे यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस से जोड़ा गया था। बता दे की मोबाइल एप्स के जरिए यूपीआई में यूजर्स को रकम भेजने में सुविधा मिलती है।
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने कुछ बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंकों ने एंप्लॉयज बेनिफिट स्कीम से जुड़ी रकम को एंप्लॉय के CBDC यानी ई रुपए में ट्रांसफर किया था। इनमें Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, HDFC Bank, IDFC first bank और Canara Bank इत्यादि बैंक भी शामिल है। वहीं रिजर्व बैंक आफ इंडिया को यह उम्मीद है कि कुछ नॉन फाइनेंशियल फर्म भी ई रुपए का इस्तेमाल कर सकती है। जिससे की ट्रांजैक्शन को बढ़ाने में आसानी होगी।
वही एक एग्जीक्यूटिव ने बताया है कि ई रुपए के यूजर्स की संख्या दिसंबर में 30 लाख से बढ़कर 40 लाख हो गई है। दरअसल CBDC के फायदे और नुकसान पर विचार करने के बाद आरबीआई ने यह ट्रायल प्रारंभ किया था। हालांकि इससे पहले आरबीआई ने क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर विरोध जताया था। बता दे की CBDC भी एक ब्लॉकचेन पर आधारित पेमेंट सॉल्यूशन है। यह क्रिप्टोकरंसी की तरह ही कार्य करता है। परंतु इसमें क्रिप्टो करेंसी की तरह अन्य रिस्क और वोलेटेलिटी नहीं रहती है। हालांकि इसका कंट्रोल सेंट्रल बैंक के पास ही होता है। वहीं देश में डिमॉनेटाइजेशन होने के बाद यूपीआई पेमेंट में काफी ज्यादा ग्रोथ दर्ज की गई है।
इस समय फ्रांस, चीन जैसे अन्य देशों में भी CBDC प्रोजेक्ट्स का ट्रायल किया जा रहा है। वही आपको बता दे कि इस समय नाइजीरिया ने अपने डिजिटल करेंसी की भी शुरुआत की है। हालांकि अभी शुरुआत में इसका कम उपयोग हो रहा है।
