साइबर क्राइम और स्कैम से बचने के लिए McAfee लाया नया AI टूल – AI तकनीक का गलत इस्तेमाल करके घोटाले, साइबर बुलिंग और पब्लिक फिगर के वीडियो में हेर फेर के लिए बनाए गए AI जनरेट ऑडियो की रोकथाम के लिए McAfee Corp. ने प्रोजेक्ट मॉकिंगबर्ड नाम से अपनी AI पावर डीप फेक ऑडियो डिटेक्शन तकनीक को लांच किया है। यह तकनीक साइबर अपराधियों द्वारा जेनरेटिव AI टूल का उपयोग कर के फेक ऑडियो को कम करने का काम करेगी। दरअसल वर्तमान में साइबर अपराधी इस प्रकार के जेनरेटिव टूल्स का उपयोग करके लोगों के परिवार के सदस्य या फिर कोई अन्य जान पहचान का व्यक्ति बनकर स्कैम का कार्य कर रहे हैं।
इसके बाद इनोवेशन और ट्रेड इंटेलिजेंस ब्रांच McAfee Labs ने प्रोजेक्ट मॉकिंगबर्ड के नाम से एक एडवांस AI मॉडल लॉन्च किया है। यह मॉडल वीडियो में AI जेनरेटेड ऑडियो को पहचान सकेगा। साथ में McAfee यह भी दावा कर रहा है कि 90% की वर्तमान एक्यूरेसी रेट के साथ चीप फेक या डीपफेक का पता लगाया जा सकेगा। जो की टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ यह यूजर्स को और ज्यादा सुरक्षा भी प्रदान करेगा।
इस विषय पर स्टीव ग्रोबमैन जो कि McAfee के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफीसर है उन्होंने बताया की यह AI डिटेक्शन टूल यूजर को डिजिटल कंटेंट की प्रमाणिकता का आकलन करने के लिए इनसाइड प्रदान करता है। कई जगहों पर इस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है। जिसमें राजनीतिक हस्तियों से लेकर सेलिब्रिटी स्कैम का पता लगाना इत्यादि संबंधित वीडियो की पुष्टि करना सम्मिलित है।
AI इनोवेशन पर McAfee का यह प्रोजेक्ट मॉकिंगबर्ड यूजर के लिए काफी सुरक्षा प्रदान करेगा। साथ ही यह AI मॉडल के व्यापक पोर्टफोलियो का भी हिस्सा है। कंपनी का मानना है कि CES 2024 में इस टेक्नोलॉजी को लॉन्च करना AI समाधान विकसित करने के लिए McAfee के उद्देश्य को दर्शाता है। दरअसल इस प्रोजेक्ट मॉकिंग बर्ड का नाम मॉकिंगबर्ड से लिया गया है जो की अन्य पक्षियों के चह चाहने की नकल करने के लिए जाने जाते हैं तथा इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भी साइबर अपराधी द्वारा धोखाधड़ी करने वाली गतिविधियों की आवाजों की रोकथाम करना है।






